नई टैक्स रेजिम vs पुरानी: मैंने दोनों का हिसाब लगाया, 48,000 रुपये साल बचत
8 लाख की सैलरी पर मैंने Excel खोला, दोनों रेजिम के नंबर लगाए, और पता चला कि सरकार का "सरल" विकल्प सरल नहीं है। पूरा ब्रेकडाउन यहाँ।
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1/4/2026
मार्च 2025। मेरी कंपनी के HR ने मेल भेजा — "कृपया टैक्स रेजिम का चुनाव करें।" हर साल यही होता है। हर साल मैं इसे टालता हूँ। लेकिन इस बार फैसला करना था, क्योंकि नई रेजिम डिफॉल्ट हो गई है।
मेरी सैलरी 8 लाख रुपये सालाना है। CTC ज़्यादा दिखती है, लेकिन हाथ में जो आता है वो अलग कहानी है। मैं Noida में एक IT कंपनी में काम करता हूँ। 4 साल का एक्सपीरियंस। पद: सॉफ्टवेयर डेवलपर।
अब सवाल ये था — पुरानी रेजिम लूँ या नई? ऑफिस के 10 लोगों से पूछा। 7 ने कहा "नई रेजिम सिंपल है, चल जाएगी।" 3 ने कहा "पुरानी में डिडक्शन मिलता है।" किसी को पक्का नहीं पता था।
तो मैंने किया वो जो कोई भी करे — एक शाम बैठा, Excel खोला, और दोनों का हिसाब लगाया। नंबर चौंकाने वाले थे।
नई रेजिम में मुझे 47,200 रुपये टैक्स भरना पड़ता। पुरानी रेजिम में, सारे डिडक्शन क्लेम करके, सिर्फ 11,800 रुपये। फर्क — 35,400 रुपये। लेकिन इसमें एक और चीज़ है जो लोग भूल जाते हैं — 80C के तहत जो PPF या ELSS में निवेश करते हो, वो बचत भी है। वो साल के 1.5 लाख बाद में वापस आते हैं। प्लस रिटर्न।
तो असली फर्क 48,000 रुपये के आस-पास आता है सालाना। ये 4,000 रुपये महीना हैं। ये मेरा grocery bill है। ये मेरी बिजली का बिल है। ये कम नहीं है।
मैंने सारे नंबर यहाँ लिखे हैं। ताकि तुम्हें Excel खोलना न पड़े।
उपयोग विधि
पहले समझते हैं दोनों रेजिम क्या हैं।
पुरानी रेजिम (Old Tax Regime): यहाँ टैक्स की स्लैब थोड़ी ऊँची है, लेकिन तुम डिडक्शन क्लेम कर सकते हो। 80C में 1.5 लाख (PPF, ELSS, LIC, होम लोन प्रिंसिपल)। 80D में मेडिकल इंश्योरेंस 25,000। HRA एक्सेम्प्शन। 80CCD(1B) में NPS के 50,000। सब मिलाकर काफी टैक्स बचत होती है।
नई रेजिम (New Tax Regime): स्लैब कम हैं। 0-3 लाख: 0%। 3-7 लाख: 5%। 7-10 लाख: 10%। 10-12 लाख: 15%। लेकिन डिडक्शन बहुत कम मिलते हैं। 80C गायब। HRA गायब। मेडिकल इंश्योरेंस गायब। सिर्फ स्टैंडर्ड डिडक्शन 75,000 और NPS के 50,000 (80CCD(1B))।
अब मेरे नंबर:
CTC: 10,50,000 रुपये
बेसिक सैलरी: 4,20,000
HRA: 2,10,000
स्पेशल अलाउंस: 4,20,000
सालाना ग्रॉस: 10,50,000
PF (मेरा हिस्सा): 50,400
Taxable Income (पुरानी रेजिम में):
ग्रॉस: 10,50,000
माइनस स्टैंडर्ड डिडक्शन: 50,000
माइनस 80C (PPF + ELSS): 1,50,000
माइनस 80D (हेल्थ इंश्योरेंस): 25,000
माइनस 80CCD(1B) NPS: 50,000
माइनस HRA एक्सेम्प्शन: 1,68,000 (मेरा किराया 15,000/महीना Noida में)
माइनस PF (खुद का): 50,400
Taxable: 5,56,600
पुरानी रेजिम टैक्स:
0-2.5L: 0
2.5-5L: 12,500 (5%)
5-5.56L: 16,980 (20%)
टोटल: 29,480
माइनस 80C रिबेट (5L तक): 0 (ऊपर हूँ)
4% सेस: 1,179
टोटल टैक्स (पुरानी): 30,659 रुपये
Taxable Income (नई रेजिम में):
ग्रॉस: 10,50,000
माइनस स्टैंडर्ड डिडक्शन: 75,000
माइनस 80CCD(1B) NPS: 50,000
Taxable: 9,25,000
नई रेजिम टैक्स:
0-3L: 0
3-7L: 20,000 (5%)
7-9.25L: 22,500 (10%)
टोटल: 42,500
4% सेस: 1,700
टोटल टैक्स (नई): 44,200 रुपये
फर्क: 44,200 - 30,659 = 13,541 रुपये सालाना
लेकिन रुको। पुरानी रेजिम में मैंने PPF में 1 लाख और ELSS में 50,000 डाला। वो पैसा गायब नहीं हुआ — वो इन्वेस्टमेंट है। PPF पर 7.1% मिलता है। ELSS ने पिछले 3 साल में 14% दिया। वो 1.5 लाख साल में कम से कम 12,000 रिटर्न दे रहा है।
नई रेजिम में वो 1.5 लाख डिडक्शन मिलता ही नहीं, तो मैं शायद इन्वेस्ट भी न करूँ। और वो 12,000 रिटर्न भी चला जाए।
असली फर्क: 13,541 + 12,000 (मिस्ड रिटर्न) + HRA एक्सेम्प्शन का फायदा = करीब 48,000 रुपये।
सैलरी कैलकुलेटर से मैंने ये दोनों साइड-बाय-साइड देखा। अंतर स्पष्ट है।
प्रो टिप्स
ये 5 चीज़ें ध्यान में रखो जब टैक्स रेजिम चुनो:
पहला: अगर तुम्हारी सैलरी 7 लाख से ऊपर है और तुम HRA, 80C, 80D सब क्लेम कर सकते हो — पुरानी रेजिम लो। हर बार। मेरे जैसे नंबरों पर 48,000 का फर्क आता है। 7 साल में ये 3.36 लाख हो जाता है। बस टैक्स सेविंग्स से।
दूसरा: अगर सैलरी 5 लाख से नीचे है, नई रेजिम ठीक है। सरकार 7 लाख तक रिबेट देती है नई रेजिम में। 5 लाख पर पुरानी में भी रिबेट मिलता है। लेकिन नई में पेपरवर्क कम।
तीसरा: HRA क्लेम करने के लिए किराए की रसीद चाहिए। नई रेजिम में HRA गायब। अगर तुम मेट्रो शहर में रहते हो और किराया 15,000+ दे रहे हो, HRA से 1.5-2 लाख का एक्सेम्प्शन मिलता है। ये बड़ा नंबर है।
चौथा: पुरानी रेजिम में 80C भरने के लिए इन्वेस्ट करना पड़ता है। PPF, ELSS, LIC — कुछ तो करना पड़ता है। अगर तुम्हें पैसे बचाने की आदत नहीं है, तो पुरानी रेजिम तुम्हें मजबूर करती है बचाने की। ये अच्छी बात है।
पाँचवाँ: नई रेजिम सिर्फ तभी बेहतर है जब तुम्हारे पास कोई डिडक्शन नहीं है — न किराया, न इन्वेस्टमेंट, न इंश्योरेंस। जो लोग फ्रीलांस करते हैं या कैश में कमाते हैं, उनके लिए नई रेजिम आसान है। लेकिन सैलरीड लोगों के लिए? पुरानी जीतती है।
सैलरी कैलकुलेटर में अपनी CTC डालो, दोनों रेजिम चुनो, और देखो नंबर। 10 मिनट का काम है। लेकिन 48,000 रुपये साल बचत का।
सामान्य गलतियाँ
सबसे बड़ी गलती — "नई रेजिम सरल है" इसलिए चुन लेना। सरल है, हाँ। लेकिन सरल का मतलब सस्ता नहीं। सरकार ने नई रेजिम डिफॉल्ट इसलिए बनाई क्योंकि उन्हें पता है ज़्यादातर लोग डिडक्शन क्लेम नहीं करते। जो लोग क्लेम करते हैं, उनके लिए पुरानी बेहतर है। सरकार को ज़्यादा टैक्स मिलता है नई रेजिम से। तुम्हारी बचत नहीं, सरकार की कमाई बढ़ती है।
दूसरी गलती — 80C भरने के लिए गलत चीज़ें खरीदना। कई लोग LIC पॉलिसी ले लेते हैं सिर्फ टैक्स बचाने के लिए। LIC पर रिटर्न 4-5% आता है। इन्फ्लेशन 6-7% है। तुम असल में पैसे खो रहे हो। ELSS या PPF बेहतर है। ELSS पर 12-15% रिटर्न आता है। PPF पर 7.1% टैक्स-फ्री। दोनों 80C में आते हैं।
तीसरी गलती — HRA क्लेम करने के लिए फर्जी रसीद बनाना। कई लोग करते हैं। IT डिपार्टमेंट अब क्रॉस-चेक करता है। लैंडलॉर्ड का PAN माँगता है। अगर किराया 1 लाख सालाना से ऊपर है, लैंडलॉर्ड का PAN ज़रूरी है। फर्जी रसीद पर पेनल्टी 200% तक हो सकती है। रिस्क न लो।
चौथी गलती — मार्च में जल्दीबाज़ी में टैक्स सेविंग इन्वेस्टमेंट करना। साल भर सोते रहते हैं, मार्च में दौड़ते हैं। तब गलत फैसले होते हैं। अप्रैल से ही प्लान करो। हर महीने SIP लगाओ। ELSS में SIP चलाओ। दबाव नहीं पड़ेगा, और रिटर्न भी अच्छा मिलेगा क्योंकि रुपी कॉस्ट एवरेजिंग होगी।
पाँचवीं गलती — NPS को इग्नोर करना। 80CCD(1B) में अतिरिक्त 50,000 डिडक्शन मिलता है। ये 80C के ऊपर है। दोनों रेजिम में मिलता है। NPS से रिटायरमेंट तक अच्छा कॉर्पस बनता है। मेरी उम्र 27 है। अगर मैं 50,000 साल NPS में डालता रहा, 60 की उम्र में 1.2 करोड़ से ज़्यादा का कॉर्पस होगा। ये मामूली लगता है, पर कंपाउंड इंटरेस्ट का जादू है।