रेंटल इनकम कैलकुलेटर: प्रॉपर्टी से असली कमाई जानें

किराया, खर्चे और टैक्स का सही हिसाब लगाएं मिनटों में

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483 words
19/3/2026
बैंगलोर में रहने वाले अमित ने ₹80 लाख का फ्लैट खरीदा। उन्होंने 20% डाउन पेमेंट यानी ₹16 लाख दिए और बाकी का 20 साल का होम लोन 8.5% ब्याज पर लिया। महीने का ₹35,000 किराया मिलता है, लेकिन जब EMI ₹55,000, मेंटेनेंस ₹4,000 और प्रॉपर्टी टैक्स निकाला तो पता चला हर महीना ₹25,000 का घाटा हो रहा है! क्या आप भी बिना सोचे-समझे प्रॉपर्टी में पैसा लगा रहे हैं? हमारा रेंटल इनकम कैलकुलेटर आपको सही तस्वीर दिखाता है ताकि आप समझदारी से निवेश करें।

How to Use

इस कैलकुलेटर का उपयोग बहुत आसान है। पहले अपनी प्रॉपर्टी की कुल कीमत डालें, जैसे ₹80 लाख। फिर मासिक किराया, मेंटेनेंस चार्जेज, प्रॉपर्टी टैक्स और अगर लोन है तो EMI भरें। कैलकुलेट बटन दबाएं और तुरंत पता चलेगा कि आपको महीने का कितना नेट प्रॉफिट या लॉस हो रहा है।

Pro Tips

स्मार्ट प्रॉपर्टी इनवेस्टर बनने के लिए ये टिप्स याद रखें। पहला - रेंटल यील्ड चेक करें। अच्छी प्रॉपर्टी में सालाना 3-4% यील्ड होती है, यानी ₹80 लाख की प्रॉपर्टी से ₹2.4-3.2 लाख सालाना किराया आना चाहिए। दूसरा - लोन EMI किराए से ज्यादा न हो। तीसरा - रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए PPF और NPS के साथ प्रॉपर्टी को भी शामिल करें। चौथा - टियर-2 शहरों में रेंटल यील्ड ज्यादा होती है, मेट्रो सिटीज की तुलना में। FD और SIP की तरह प्रॉपर्टी भी पोर्टफोलियो का हिस्सा होनी चाहिए।

Common Mistakes to Avoid

भारतीय निवेशक अक्सर तीन बड़ी गलतियाँ करते हैं। पहली - सिर्फ किराया देखकर खुश हो जाना। ₹30,000 मासिक किराया अच्छा लगता है, लेकिन सोसाइटी चार्जेज, प्रॉपर्टी टैक्स, इंश्योरेंस और मरम्मत खर्च को भी घटाना जरूरी है। दूसरी गलती - वैकेंसी पीरियड को नजरअंदाज करना। भारत में टैनेंट बदलते समय 2-3 महीने तक प्रॉपर्टी खाली रह सकती है। तीसरी गलती - टैक्स को भूल जाना। अगर आपकी सालाना सैलरी ₹12 लाख है और किराए में ₹3 लाख मिलते हैं, तो 30% टैक्स स्लैब में ₹90,000 टैक्स भी देना पड़ेगा।

Frequently Asked Questions

किराए की आय पर टैक्स कैसे बचाएं?

सेक्शन 24(b) के तहत होम लोन का ब्याज ₹2 लाख तक डिडक्शन मिलता है। सेक्शन 80C में प्रिंसिपल ₹1.5 लाख तक। म्युनिसिपल टैक्स भी घटा सकते हैं। मान लीजिए ₹3 लाख सालाना किराया है, स्टैंडर्ड डिडक्शन 30% यानी ₹90,000। बचत ₹2.1 लाख पर ही टैक्स लगेगा।

FD, SIP और प्रॉपर्टी में कहाँ ज्यादा फायदा?

FD में 6-7% सेफ रिटर्न। SIP में 12-15% लॉन्ग टर्म रिटर्न। प्रॉपर्टी में रेंटल यील्ड 2-4% प्लस कैपिटल एप्रिशिएशन 8-12%। ₹80 लाख की प्रॉपर्टी 10 साल में ₹1.6 करोड़ हो सकती है। सही मिक्स रखें - 40% SIP, 30% प्रॉपर्टी, 20% PPF/FD, 10% इमरजेंसी फंड।

कब समझें कि प्रॉपर्टी प्रॉफिटेबल नहीं है?

अगर मासिक EMI ₹55,000 है और किराया सिर्फ ₹30,000 आ रहा है, तो हर महीने ₹25,000 जेब से जा रहे हैं। ऐसे में प्रॉपर्टी को प्री-एम्प्टी करें या बेच दें। प्रॉपर्टी तभी रखें जब लॉन्ग टर्म में कैपिटल ग्रोथ की उम्मीद हो।

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