कैश ऑन कैश रिटर्न कैलकुलेटर: प्रॉपर्टी निवेश का असली मुनाफा
जानें आपका पैसा रियल एस्टेट में कितना कमा रहा है
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422 words
19/3/2026
मान लीजिए आप सालाना ₹12 लाख कमाते हैं और आपने ₹80 लाख का घर खरीदने का फैसला किया। बैंक से 20% डाउन पेमेंट यानी ₹16 लाख आपने अपनी जेब से दिए। अब सवाल उठता है - क्या यह निवेश सही है? कैश ऑन कैश रिटर्न आपको बताता है कि आपने जो पैसा अपनी जेब से निकाला, उस पर आपको कितना रिटर्न मिल रहा है। यह FD या SIP की तरह ही एक दर है, लेकिन सिर्फ प्रॉपर्टी के लिए। हमारा कैलकुलेटर आपको सेकंडों में यह आंकड़ा दे देगा।
How to Use
बस तीन आसान स्टेप्स: पहले अपना डाउन पेमेंट डालें (जैसे ₹16 लाख), फिर सालाना किराया आय और खर्चे भरें। कैलकुलेटर तुरंत आपका कैश ऑन कैश रिटर्न प्रतिशत दिखा देगा। 8% से ज्यादा होने पर निवेश अच्छा माना जाता है।
Pro Tips
पहला टिप - अपने कैश ऑन कैश रिटर्न की तुलना FD की 7% दर से करें। अगर प्रॉपर्टी में कम मिल रहा है, तो सोचें। दूसरा - NPS और PPF जैसे सुरक्षित विकल्पों से भी तुलना करें जो 7-8% देते हैं। तीसरा - 20 साल के होम लोन पर 8.5% ब्याज दर के साथ अपनी EMI और किराया आमदनी को बैलेंस करें। चौथा - टियर-2 और टियर-3 शहरों में कैश ऑन कैश रिटर्न अक्सर 10-12% तक मिलता है, क्योंकि प्रॉपर्टी कीमतें कम हैं।
Common Mistakes to Avoid
भारत में कई लोग पूरी प्रॉपर्टी की कीमत से रिटर्न गिनते हैं, जो गलत है। असली रिटर्न तो डाउन पेमेंट से मिलता है। दूसरी गलती - लोग मेंटेनेंस, प्रॉपर्टी टैक्स और सोसाइटी चार्जेस को छोड़ देते हैं। मान लीजिए ₹20,000 किराया में से ₹5,000 खर्चे निकल जाएंगे। तीसरी गलती - वैकेंसी को नहीं समझना। भारत में किराएदार बदलने में 1-2 महीने लग ही जाते हैं, इसे भी गिनें।
Frequently Asked Questions
कैश ऑन कैश रिटर्न कितना होना चाहिए?
भारत में अच्छा कैश ऑन कैश रिटर्न 8-12% माना जाता है। अगर आपको 6% से कम मिल रहा है, तो FD में पैसा लगाना बेहतर है। मेट्रो शहरों में 6-8% और छोटे शहरों में 10%+ आम है।
क्या यह SIP रिटर्न से बेहतर है?
इक्विटी SIP में लंबे समय में 12-15% रिटर्न मिलता है। लेकिन प्रॉपर्टी में लीवरेज (लोन) का फायदा है। ₹16 लाख डाउन पेमेंट पर आप ₹80 लाख की एसेट कंट्रोल करते हैं। दोनों की अपनी जगह है।
क्या मैं किराए के साथ कैपिटल एप्रीसिएशन भी जोड़ सकता हूं?
नहीं, कैश ऑन कैश रिटर्न सिर्फ किराया आमदनी मापता है। कैपिटल एप्रीसिएशन अलग से गिनें। भारतीय प्रॉपर्टी में सालाना 5-8% एप्रीसिएशन एवरेज माना जा सकता है।
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